Reference No: CMHS0017-HindiPages: 10Published on: 1, January, 2003
Abstract: अहमदाबाद नगर निगम (एएमसी) अपने नागरिकों को तृतीयक स्तर की स्वास्थ्य देखभाल सेवाएँ उपलब्ध कराते हुए तीन बड़े अस्पतालों का संचालन करता है, जो हैं - वी.एस. अस्पताल, एस.सी.एल. अस्पताल, एवं एल.जी. अस्पताल। शिक्षा अस्पताल के रूप में, वी.एस., एस.सी.एल., एवं एल.जी. अस्पताल भारतीय चिकित्सा परिषद् (एमसीआई) द्वारा निर्धारित नियमों से कार्मिकों अथवा विभागों एवं रोगियों की देखभाल व शिक्षा के संबंध में बाध्य है। ये नियम एमबीबीएस तथा एमडी कोर्स के लिए दाखिला प्राप्त वार्षिक छात्रों की संख्या पर आधारित होते हैं। अकादमिक वर्ष 2000-01 के प्रारम्भ से, एएमसी ने नये वार्षिक एमबीबीएस दाखिले में 50 बैठकों की वृद्धि की। एएमसी चिकित्सा कॉलेजों के डीन ने प्रति वर्ष 150 वार्षिक दाखिलों के लिए एमसीआई के नियमों का अनुपालन करने के लिए प्रत्येक अस्पताल में चिकित्सा विभागों की पहचान की है। अस्पताल के अधीक्षक रोगी देखभाल के बारे में इस पुनर्गठन के प्रभाव के बारे में चिंतित हैं। ... More
Reference No: P&IR0229-HindiPages: 13Published on: 23, June, 2015
Abstract: इस केस में भारत की एक बड़ी आईटी कंपनी एएक्सजेड के रीजनल हेड एच.आर. श्री मेहता की दुविधा का वर्णन किया गया है। श्री मेहता को एक कर्मचारी श्री राजेश कुमार की अपील प्राप्त हुई थी, जिन्होंने आरोप लगाया था कि उनके प्रबंधक श्री योगेश देसाई द्वारा उनका गलत मूल्यांकन किया गया था। देसाई और कुमार दोनों ने श्री मेहता के समक्ष अपने दृष्टिकोण प्रस्तुत किए हैं। जबकि श्री मेहता प्रदर्शन मूल्यांकन प्रक्रिया में श्री देसाई की चुनौतियों को समझते हैं, वे राजेश के बारे में भी चिंतित हैं, जो दुर्लभ कौशलों से सज्ज प्रतिभाशाली कर्मचारी हैं। दो कर्मचारियों से संबंधित इस केस के विशिष्ट मुद्दों के अलावा, श्री मेहता वर्तमान प्रदर्शन मूल्यांकन प्रणाली से उत्पन्न होने वाली समस्याओं के बारे में भी चिंतित हैं, विशेष रूप से एएक्सजेड द्वारा यूटीवीसी का अधिग्रहण करने के बाद, जिसमें एक बहुत ही अलग प्रदर्शन मूल्यांकन प्रणाली थी। इस केस से संगठनों में प्रदर्शन मूल्यांकन प्रक्रियाओं में बेल कर्व कार्यान्वयन और भेदभाव से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा करने का अवसर भी मिलता है। ... More
Reference No: OB0202-HindiPages: 2Published on: 30, April, 2008
Abstract: यह केस स्वयं एक पत्र का रूप है जो स्कूल के आचार्य एवं शिक्षकों के मध्य संचार बनाता है। आचार्य ने शिक्षकों को आदेश दिया था कि शिक्षकों को स्कूल में विराम के दौरान अपने फालतू समय के 20 मिनट्स स्कूल की केन्टीन में व्यतीत करने चाहिए और छात्रों के साथ बैठकर चाय लेनी चाहिए। शिक्षकों को यह आदेश क्रूर लगा और अनौपचारिक बैठक में अपनी पीड़ा व्यक्त करने में विफल रहने के बाद उन्होंने समूह में मिलकर आचार्य को सामूहिक पत्र लिखा कि उन्हें अपने कार्मिक खंड में ही चाय पीने दी जाये। आचार्य को यह पत्र पढ़कर काफी बुरा लगा और इस रुख में अडग रहीं। वह उन सभी से ऐसी अपेक्षा रखती हैं कि वे आदेश का पालन करें क्योंकि छात्र-शिक्षकों के बीच वह बड़ी अंतर्क्रिया देखना चाहती थी। ... More